जानिए क्यूँ Columbia में लोग कॉफिन में आराम करने को हुए मजबूर?

कम्पनी के मैनेजर रोडोल्फ़ गोम्स ने बताया है “इस बस्तर को बनाने के  लिए मोटे कार्डबोर्ड और मेटल का इस्तेमाल किया गया है. जिससे इसकी मजबूती पर कोई प्रभाव नही पड़ेगा. इस बिस्तर पर 150 किलो का तक का आदमी आसानी से आराम कर सकता है. इस बिस्तर की कीमत 85 डॉलर रखी गई है”.

कोरोना वायरस की वजह से लगातार मौतों का आंकड़ा बढता ही जा रहा है. कोरोना महामारी से अमेरिका और यूरोप के देशों में इतनी मौतें हुई है कि मरने वालों के लिए कब्रिस्तान में जगह और ताबूत की कमी पड़ गयी है. इसके साथ ही PPE किट और दूसरे मेडिकल सामान की किल्लत भी हो रही है. इसको देखते हुए कोलंबिया की एक कम्पनी ने कोरोना से जूझ रहे देशों के लिए बेड कम कॉफिन बनाए है. 

मरने से पहले बेड बाद में कॉफिन!

इन बिस्तरों को इस तरह से बनाया गया है, जिसमे मरीज़ का इलाज होगा और इलाज के दौरान मरीज़ की मौत हो जाती है तो ये बिस्तर कॉफिन का काम भी करेगा. इस बिस्तर को कार्डबोर्ड से बनाया है, जिसमे चारों ओर मेटल की रेलिंग बनाई है. जो इस बिस्तर को मजबूत बनाता है.

अगर दुर्भाग्यवश मरीज़ की मृत्यु हो जाती है तो इसको मोड़कर कॉफिन बन जाएगा. इक्वाडोर में होने वाली मौतों से ताबूत की जो किल्लत हो रही है साथ ही साथ कितने मरीजों को अस्पतालों में बिस्तर तक नसीब नही हो रहे थे. जिसकी परेशानी को ख़त्म करने के लिए टू इन वन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है.

कम्पनी के मैनेजर रोडोल्फ़ गोम्स ने बताया है “इस बस्तर को बनाने के  लिए मोटे कार्डबोर्ड और मेटल का इस्तेमाल किया गया है. जिससे इसकी मजबूती पर कोई प्रभाव नही पड़ेगा. इस बिस्तर पर 150 किलो का तक का आदमी आसानी से आराम कर सकता है. इस बिस्तर की कीमत 85 डॉलर रखी गई है”.

दरअसल, ताबूत बनाने वाली कम्पनी एक विज्ञापन कम्पनी है. लॉकडाउन की वजह से कम्पनी को भारी नुकसान हो रहा है. जिसके चलते एक निजी क्लीनिक के साथ मिलकर इस बेड कम कॉफिन को तैयार किया गया है. अब इसकी वजह से मरीज़ की मौत हो जाने पर परिजनों को ताबूत के लिए परेशान नही होना पड़ेगा. इस बिस्तर को गरीबों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है. हालांकि इस बेड कम कॉफिन में कोरोना से मौत के बाद मरीज़ को लिटाने से पहले सील बैग में रखने की डॉक्टर ने सलाह दी है जिससे संक्रमण न फैले. 
 

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