धनतेरस का नहीं है सोना खरीदने से संबंध, कुछ विशेष चीजों की खरीददारी मानी जाती है शुभ

धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी और कुबेर की पूजा की जाती है और कुछ विशेष चीजों की खरीददारी को इस दिन शुभ माना गया है।

आज देशभर में धनतेरस का त्योहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। धनतेरस के दिन सोने की खरीददारी को शुभ माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोने की खरीददारी के नाम पर व्यापारियों ने इस दिन को बदनाम कर दिया है। धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी और कुबेर की पूजा की जाती है और कुछ विशेष चीजों की खरीददारी को इस दिन शुभ माना गया है।

धनतेरस पर कुछ विशेष चीजों का खरीदना माना जाता है शुभ

धनतेरस के दिन विशेषतौर पर पीतल या चांदी के बर्तन खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा झाड़ू खरीदना भी धनतेरस के दिन काफी शुभ माना जाता है। इससे दरिद्रता का नाश होता है और पॉजिटिवनेस का संचार होता है।

धनतेरस मनाने के पीछे है एक पौराणिक कथा

इन सबके अलावा धनतेरस को मनाने की पीछे एक पौराणिक कथा भी है। ये कथा कुछ इस तरह है कि भगवान धनवंतरी भगवान विष्णु का अंश हैं। भगवान धनवंतरी का प्रकट होने का दिन कार्तिक कृष्णपक्ष त्रयोदशी के दिन माना जाता है। कथा के मुताबिक, एक बार महर्षि दुर्वासा के साथ देवराज इंद्र ने गलत आचरण कर दिया था, जिसके कारण उन्होंने तीनों लोकों को श्रीहीन होने का श्राप दिया था।

इसके बाद सभी देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास गए और इसका समाधान पूछा। उन्होंने कहा कि देवता और असुरों को साथ मिलर समुद्र मंथन करनना होगा, क्योंकि ये किसी एक के बस की बात नहीं है। इसके बाद समुद्र मंथन शुरू हुआ।

मंदराचल पर्वत को मथानी और नागों के राजा वासुकी को मथानी के लिए रस्सी बनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। स्वंय भगवान विष्णु कछप अवतार लेकर पर्वत की पीठ बन गए। मुंह असुरों की ओर था और पूंछ देवताओं की और थी। इसके बाद चौदहवें रत्न के रूपस में स्वंय भगवान धनवंतरी प्रकट हुए, जो अपने हाथों में अमृतकलश लिए हुए थे। भगवान विष्णु ने इन्हें देवताओं का वैद्य और वनस्पतियों तथा औषधियों का स्वामी नियुक्त किया। 

इस दिन इनकी पूजा-अराधना अपने और परिवार के स्वस्थ शरीर के लिए करें, क्योंकि संसार का सबसे बड़ा धन अरोग्य शरीर है। पुराण कहते हैं कि "शरीर माध्यम खलु धर्म साधनम्" यानि कि धर्म का पालन नही कर सकता है, जिसके पास अच्छा शरीर हो इसलिए निरोगी होना जरूरी है।

समुद्र मंथन की अवधि के मध्य शरद पूर्णिमा को चंद्रमा, कार्तिक, द्वादशी को कामधेनु गाय, त्रयोदशी को धनवंतरी और अमावस्या को महालक्ष्मी का प्रादुर्भाव हुआ। धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि की पूजा करनी चाहिए और उनसे प्राथना करनी चाहिए कि वो हमें हमेशा निरोगी रखें।

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