ये मछली केवल तैरती नहीं उड़ती भी है !

हम सभी यह जानते हैं कि मछली पानी के बाहर जीवित नहीं रह सकती. पानी से बाहर कुछ समय में ही मछली की मौत हो जाती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक मछली ऐसी भी है जो उड़ती है  एक्सोसिटस फिश पानी की सतह से 50 से 200 मीटर तक उड़ सकती है. इन मछलियों को फ्लाइंग फिश और फ्लाइंग कॉड भी कहा जाता है. 

एक्सोसिटस फिश सभी महासागर में पाई जाती है ख़ास तौर पर ट्रॉपिकल् और गर्म सब-ट्रॉपिकल् सागर में 200 मीटर की गहराई में पाई जाती है. एक्सोसिटस  फिश की उड़ने की कला उसे शिकारियों से बचाती है यह ठीक एक पक्षी की तरह पानी की सतह पर से शक्तिशाली छलांग लगाती है और इसके लम्बे पंख हवा में ग्लाइड करने में इसकी मदद करते है. जो इसको शिकारियों से बचने के लिए मुख्य रूप से काम आते है.

        

एक ग्लाइड के अंत में  वह समुद्र में फिर से प्रवेश करने के लिए अपने पेक्टोरल पंखों को मोड़ते हैं  या एक और ग्लाइड के लिए लिफ्ट करने के लिए अपनी पूंछ को पानी में गिराते हैं यह मछली हवा और सागर की लहरों की मदद से अपने उड़ने के समय को बड़ा या घटा सकती है.

जहाज के आविष्कार के लिए हुआ अध्ययन
1900 से 1930 के दशक तक  उड़ने वाली मछलियों का अध्ययन संभव मॉडल के रूप में किया जाता था जो हवाई जहाज को विकसित करने के लिए उपयोग की जाती थीं.

इस देश की है राष्ट्र प्रतीक
बारबाडोस वी त्रिनिदाद और टोबैगो में एक्सोसिटस फिश को राष्ट्र का प्रतीक माना जाता है. एक्सोसिटस फिश के नाम पर उन्होंने अपने देश की एक्सोसेट मिसाइल नाम रखा है. क्योंकि वेरिएंट को पानी के नीचे से लॉन्च किया जाता है.

इन देशों में चाव से किया जाता है इसका सेवन 
एक्सोसिटस  फिश को जापान, वियतनाम और चाइना में व्यापार होता है. इस मछली को सुखाकर शराब से साथ इसका सेवन किया जाता है. जापान में इससे सुशी भी बनायीं जाती है. बारबाडोस में फ्लाइंग फिश से राष्ट्रीय व्यंजन बनया जाता है. इसका स्वाद सार्डीन मछली जेसा होता है.
 

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