Jurassic Park: इस फिल्म में दिखाए गए तथ्य 'काल्पनिक' हैं, वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं!

'जुरासिक पार्क' फिल्म के फैन को शायद ये थ्योरी गलत लगे क्योंकि वेलोसिरैप्टर डायनासोर को फिल्म में झुण्ड में शिकार करते हुए दिखाया है पर ऐसा नही है ये झुण्ड में शिकार नहीं किया करते थे. 1993 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'जुरासिक पार्क' में हमने रैप्टर्स को इंसान जितना बुद्धिमान,तेज़,झुण्ड में शिकार करने वाले के रूप में दिखाया गया था जो उन्हें टॉप क्लास शिकारी बनाता है. हाल ही में एक रिसर्च सामने आई है जिसमे रैपटर्स को लेकर ऐसे खुलासे किए गए हैं जो जुरासिक पार्क फिल्म की थ्योरी को पूरी तरफ बदल कर रख देती है. रैपटर्स के दांतों के एक नए विश्लेषण, जो पैलियॉगोग्राफी, पेलियोक्लामेटोलॉजी, पैलेओकोलॉजी मैगजींस में छपे हुए हैं, उससे पता चलता है कि रापोरियल डायनासोर संभवतः भेड़ियों की तरह झुण्ड में शिकार नहीं करते थे।

जुरासिक पार्क फिल्म में गलत दिखाया! 

हाल ही में, अमेरिका में विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ओशकोश ने रैप्टर के व्यवहार का एक अलग मॉडल का प्रस्ताव दिया है, जिसे कोमोडो ड्रेगन की तरह अधिक शक्तिशाली माना जाता है, जिसमें जीव एक समय पर एक ही जानवर पर हमला कर सकते हैं, लेकिन यह सहयोग सीमित है.

क्या कहता है अध्यन?
शोधकर्ता जोसेफ फ्रेडरिकसन ने कहा "रैपेटोरियल डायनासोर अक्सर भेड़ियों के समान झुण्ड में शिकार करते हुए दिखाए जाते हैं. इस व्यवहार के लिए मिले सबूत, पूरी तरह से आश्वस्त नहीं करते. चूंकि हमने इन डायनासोरों को शिकार करते हुए नही देखा है, हमें जीवन में उनके व्यवहार का निर्धारण करने के लिए अप्रत्यक्ष तरीकों का उपयोग ही कर सकते है, 

"इस विचार के साथ समस्या यह है कि जीवित डायनासोर (पक्षी) और उनके रिश्तेदार (मगरमच्छ) आमतौर पर समूहों में शिकार नहीं करते हैं, और शायद ही कभी खुद से बड़े शिकार करते हैं”.

हाल ही में, शोधकर्ताओं ने रैप्टर में व्यवहार के लिए एक अलग मॉडल का प्रस्ताव किया है जो कि कोमोडो ड्रेगन या मगरमच्छ की तरह अधिक माना जाता है, जिसमें जीव एक समय पर एक ही जानवर पर हमला कर सकते हैं लेकिन सहयोग सीमित है।

फ्रेडरिकसन ने कहा "यह वही है जो हम एक जानवर के लिए उम्मीद करेंगे, जहां माता-पिता अपने युवा के लिए भोजन प्रदान नहीं करते हैं," उन्होंने कहा, "हम राप्टर्स में भी यही पैटर्न देखते हैं, जहां सबसे छोटे दांत और बड़े दांतों में एक ही औसत कार्बन आइसोटोप वैल्यू नहीं होती है, यह दर्शाता है कि वे अलग-अलग खाद्य पदार्थ खा रहे थे,"। शोधकर्ता ने कहा, "इसका मतलब यह है कि युवाओं को वयस्कों द्वारा नहीं खिलाया जा रहा था, यही वजह है कि हम मानते हैं कि जुरासिक पार्क में उनके गलत व्यवहार के बारे में दर्शाया है.

तो ये तो साफ़ है कि जुरासिक पार्क फिल्म में दिखाया सच दाल में मिले नमक की तरह का सच है यानि कि तथ्य कुछ और भी हैं जो हम समझ नहीं सके हैं. 

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